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Monday, October 26, 2015

‘रेख़्ता’ उर्दू शायरी का ऑन-लाइन ख़ज़ाना

www.rekhta.org (A comment by a user named Binod Rai on Rekhta's Facebook Page)

‘रेख़्ता’ उर्दू शायरी का ऑन-लाइन ख़ज़ाना

पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश के सांस्कृतिक नक्शे में एक बड़ी ख़ूबसूरत और हैरत में डालनी वाली तब्दीली आ रही है। यह बदलाव अभी पूरी तरह सतह पर नहीं आया है, इसलिए लोगों की नज़रों में भी नहीं आ सका है, लेकिन बहुत जल्द यह अपनी ताकतवर मौजूदगी का एलान करने वाला है। यह बदलाव है उर्दू शायरी से उन लोगों की बढ़ती हुई दिलचस्पी जो उर्दू नहीं जानते लेकिन उर्दू ग़ज़ल की शायरी को दिल दे बैठे हैं। उर्दू शायरी से दीवानगी की हद तक बढ़ी हुई यह दिलचस्पी इन लोगों को, जिनमें बड़ी तादाद नौजवानों की है, ख़ुद शायरी करने की राह पर ले जा रही है। इसके लिए बहुत से लोग उर्दू लिपि सीख रहे हैं। इस वक़्त पूरे देश में उर्दू शायरी के दीवाने तो लाखों हैं मगर कम से कम पाँच हज़ार नौजवान लड़के-लड़कियाँ हैं जो किसी न किसी रूप और सतह पर उर्दू शायरी पढ़ और लिख रहे हैं।

उर्दू शायरी के इन दीवानों को जिनकी तादाद बढ़ती जा रही है, कुछ दुश्वारियों का सामना भी करना पड़ता है। सब से बड़ी मुश्किल यह है कि पुराने और नए उर्दू शायरों का कलाम प्रमाणिक पाठ के साथ एक जगह हासिल नहीं हो पाता। ज़्यादातर शायरी देवनागरी में उपलब्ध नहीं है, और है भी तो आधी-अधूरी और बिखरी हुई। किताबें न मिलने की वजह से अधिकतर लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं मगर वहां भी उनकी तलाश को मंज़िल नहीं मिलती।

लेकिन अब उर्दू शायरी पढ़ने और सुनने की प्यास और तलाश की एक मंज़िल मौजूद है- वह है सारी दुनिया में उर्दू शायरी की पहली प्रमाणिक और विस्तृत वेब-साइट ‘रेख़्ता’ ..... । उर्दू शायरी की इस ऑन-लाइन पेशकश का लोकार्पण 11 जनवरी, 2013 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री जनाब कपिल सिब्बल जी ने किया था। इस वेब-साइट का दफ़्तर नोएडा में है।

‘रेख़्ता’ एक उद्योगपति श्री संजीव सराफ़ की, उर्दू शायरी से दीवनगी की हद तक पहुँची हुई मोहब्बत का नतीजा है। दूसरों की तरह उन्हें भी उर्दू शायरी को देवनागरी लिपि में हासिल करने में दुश्वारी हुई, तो उन्होंने अपने जैसे लोगों को उनकी महबूब शायरी उपलब्ध कराने के लिए ‘रेख़्ता’ जैसी वेब-साइट बनाने का फैसला किया, और इसके लिए ‘रेख़्ता फाउंडेशन’ की नींव रखी गई।

शुरू होते ही यह वेब-साइट एक ख़ुश्बू की तरह हिन्दोस्तान और पाकिस्तान और सारी दुनिया में मौजूद उर्दू शायरी के दीवानों में फैल गई। लोगों ने इसका स्वागत ऐसी ख़ुशी के साथ किया जो किसी नदी को देख कर बहुत दिन के प्यासों को होती है। दिलचस्प बात यह है कि उर्दू शायरी की इतनी भरपूरी वेब-साइट आज तक पाकिस्तान में भी नहीं बनी, जहाँ की राष्ट्रभाषा उर्दू है। ‘रेख़्ता’, सारी दुनिया के उर्दू शायरी के आशिकों को, उर्दू की मातृभूमि हिन्दोस्तान का ऐसा तोहफ़ा है जो सिर्फ वही दे सकता है।

रेख्ता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 300 साल की उर्दू शायरी का प्रमाणिक पाठ, उर्दू, देवनागरी और रोमन लिपियों में उपलब्ध कराया गया है। अब तक लगभग 1000 शायरों की लगभग 10,000 ग़ज़लें अपलोड की जा चुकी हैं। इनमें मीर, ग़ालिब, ज़ौक़, मोमिन, आतिश और दाग़ जैसे क्लासिकल शायरों से लेकर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, साहिर लुधियानवी, अहमद फ़राज़, शहरयार, निदा फ़ाज़ली, कैफ़ी आज़मी जैसे समसामयिक शायरों का कलाम शामिल है। कोशिश की गई है प्रसिद्ध और लोकप्रिय शायरों का अधिक से अधिक प्रतिनिधि कलाम पेश किया जाये। लेकिन ऐसे शायरों की भी भरपूर मौजूदगी को सुनिश्चित किया गया है, जिनकी शायरी मुशायरों से ज़्यादा किताब के पन्नों पर चमकती है। शायरी को पढ़ने के साथ-साथ ऑडियो सेक्शन में इसे सुना भी जा सकता है। इस के अलावा बहुत से शायरों की प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गई ग़ज़लें भी पेश की गई हैं।

‘रेख़्ता’ का अपना ऑडियो और वीडियो स्टूडियो भी है जहाँ शायरों को बुलाकर उनकी ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग की जाती है। नवोदित शायरों को एक जीवंत प्लेटफार्म देना ‘रेख़्ता’ का एक ख़ास मक़सद है, जिसके तहत कवि-गोष्ठियाँ की जाती है और उनकी रिकार्डिंग पर उपलब्ध कराई जाती है।

उर्दू शायरी सुनने और पढ़ने वाले गैर-उर्दू भाषी लोगों को यह मुश्किल भी पेश आती है कि उन्हें बहुत से शब्दों का अर्थ मालूम नहीं होता। इस मुश्किल को हल करने के लिए एक ऑन-लाइन शब्दकोष भी ‘रेख़्ता’ पर मौजूद है जहाँ वेबसाइट में शामिल हर शेर के हर शब्द का अर्थ दिया गया है। आप स्क्रीन पर नज़र आने वाले किसी भी शब्द पर क्लिक करके उसका अर्थ जान सकते हैं। इसके अलावा शब्द-समूहों या तरकीबों के अर्थ भी पेश किए गए है। ‘रेख़्ता’ पर उर्दू ग़ज़ल की परम्परा, प्रतीकों और रचनात्मक विशेषताओं की व्याख्या भी की गई है, ताकि नवोदित शायरों को रचना प्रक्रिया में आसानी हो सके।

‘रेख़्ता’ का एक और ख़ास पहलू इसका ‘ई-लाइब्रेरी’ सेक्शन है जहाँ उर्दू की पुरानी अनुपलब्ध किताबों को एक ऑन-लाइन आर्काइव में सुरक्षित किया जा रहा है। इस सेक्शन में शायरी के अलावा दूसरी विधाओं की किताबें और आज के लेखकों की किताबें भी अपलोड की जा रही हैं। ‘रेख़्ता’ की ‘ई-लाइब्रेरी’ में अब तक लगभग 1000 किताबें शामिल की जा चुकी हैं। मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित दुर्लभ पुस्तकों को रेख़्ता पर अपलोड किया जा रहा है। प्रसिद्ध उर्दू लेखक सआदत हसन मंटो की महत्वपूर्ण कहानी संग्रह को रेख़्ता पर अपलोड किया जा चुका है। हाल ही में रेख़्ता को यूज़र फ़्रेंडली बनाया गया है जिससे रेख़्ता पर उपलब्ध साम्रगी को मोबाइल फोन पर भी आसानी से पढ़ा जा सकता है। रेख़्ता पर पहली बार ग़ालिब के ख़तों का संग्रह भी उपलब्ध कराया गया है।

उर्दू की पुरानी, नई किसी भी शायरी या शायर के बारे में किसी को जो कुछ भी जानना हो, उसका जवाब ‘रेख़्ता’ पर मौजूद है। अगर सवाल का जवाब न मिले तो यह सवाल ‘कमेंट’ सेक्शन में पोस्ट किया जा सकता है। कोशिश की जाती है कि यह जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाये। ‘रेख़्ता’ की तरफ़ से नवोदित शायरों को शायरी करने में आने वाली दुश्वारियों को दूर करने में मदद देने के लिए ‘मशवरे’ का सिलसिला भी शुरू होने वाला है।

‘रेख़्ता’ नए हिन्दोस्तान के दिलो-दिमाग़ में उठने वाले विचारों और अनुभवों की उथल-पुथल और चकाचौंध को स्वर देने का एक सशक्त ऑल-लाइन माध्यम है। ‘रेख़्ता’ देश की नई नस्ल के वैचारिक और भावनात्मक सशक्तीकरण का एक ऐसा ज़रिया है, जिससे हमारे देश के सांस्कृतिक भविष्य को एक नई वैचारिक द्रष्टि और नया सौन्दर्य बोध हासिल हो सकता है।

Response by Saquib Jamal Ansari on the post

इतने दिनों से इस्तिफ़ादा कर रहे थे मगर रेख़्ता की पूरी तारीख़ आज पढ़ी!
मुझ जैसे लोग वाक़ई जनाब संजीव सराफ़ के तहे-दिल से ममनून ओ मशकूर रहेंगे जिन्होंने हमारे इस शौक़ को तरह तरह के एहतिमाम व लवाज़िमात के वज़न से आज़ाद करवा कर सीधे हमारे हाथ (mobile phone) में थमा दिया! वरना पहले लाइब्रेरियों में घण्टों सर खपाने और पसीना बहाने के बाद किसी पसंदीदा शायर का मतलूब कलाम तलाश पाना मुमकिन हो पाता था!  (#तशक्कुर)

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